दोस्तों हमारे भारतीय संविधान में तरह तरह के अधिनियम बने है। आज के इस आर्टिकल में मैं सूचना के अधिकार के अधिनियम के विषय में बताऊंगा की इस अधिनियम का कितना महत्व है। यह हमारे लिए कितना जरूरी है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 जो की भारतीय आम नागरिक के लिए है।

इस अधिनियम के माध्यम से आप जब चाहे , सरकार के द्वारा चलाये जा रहे हर योजना के विषय में सही सही जनकरीं हासिल कर सकते हैं। जैसे यदि आप पता करना चाहते है की आपको महीने का कितना राशन मिलना चाहिए.? या आप के गांव में पक्की सड़के और नालियों का निर्माण क्यों नही हुआ है.? आप के गांव के नजदीकी स्वास्थ केंद्र में क्या क्या सुविधाएं होनी चाहिए.? आपके गांव या कस्बे में बिजली क्यों नही है.? आप के गांव में स्कूल क्यों नही है.? किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए सरकारी या कानूनी प्रक्रिया क्या है.?

इस अधिनियम के साफ तौर पर यह मतलब है की जनता के हित के लिए शासन द्वारा किये गए कार्यों में पारदर्शिता हो और जनता के हित के कार्यों के लिए शासन जबाबदेही निश्चित करें। इस अधिनियम के द्वारा आम जनता यह जान सकेगी की कही जानबूझ के सरकारी कार्यों में देरी तो नही हो रही है.? ऐसे ही चीज़ों की देखरेख के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 बनाया गया हैं।

इस अधनियम के अंतर्गत केंद्रीय और राज्य सूचना आयोगों का गठन किया गया है। इस अधनियम के अनुसार देश के हर नागरिक को यह अधिकार है की वो कुछ खास मामलों को छोड़कर किसकी भी विषय पर सूचना पाने का अधिकार रखता हैं।

  • अब बात करते है हम कैसे और कौन से तरीके से सूचनाएं माग सकते है।

– वैसे तो सादे कागज पर आवेदन देकर सूचना की माग की जा सकती हैं। आवेदन के साथ आवेदन कर्ता को 10 रुपये शुल्क निर्धारित तरीके से जमा करवाना होता हैं।

केंद्रीय और राज्य के आयोगों द्वारा शुल्क जमा करने के लिए जो विधियाँ निर्धारित की है उसमे नकद,डिमांड ड्राफ्ट, बैंक चेक आदि तरीके मौजूद है। जो भी चेक, ड्राफ्ट आदि बनवाये जाए वह उस विभाग के जन सूचना अधिकारी के नाम से हो जिससे सूचना माँगी जा रही है।

– आवेदन पत्र को संबंधित जन सूचना अधिकारी को आवेदनकर्ता खुद या डाक के माध्यम से भेज सकता हैं।

– आवेदनकर्ता के लिए सूचना माँगने का कारण बताने की कोई जरूरत नही है लेकिन आवेदन पत्र पर अपना निवास पता देना होगा जिससे आवेदनकर्ता से संपर्क या पत्र व्यवहार किया जा सके।

– आवेदन कर्ता द्वारा पूछे गए सवालों को बाकायदा साफ साफ सब्दो को बिंदुबार से लिखना जरूरी हैं। यह भी साफ साफ तरीके से लिखें की आवेदनकर्ता को किस विषय में क्या-क्या जनकरीं चाहिए।

– यदि आवेदनकर्ता गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर कर रहा है तो उसे आवेदन शुल्क देने की कोई आवश्यकता नही है किंतु प्रमाण के तौर पर उसे अपने गरीबी रेखा के नीचे रहने के प्रमाण पत्र की छायाप्रति आवेदनपत्र के साथ जोड़ना जरूरी हैं।

– आवेदनकर्ता जन सूचना अधिकारी से कोई भी ज्ञापन, राय, सलाह, आदेश, कॉन्ट्रेक्ट, रिपोर्ट नमूने, आंकड़े, मॉडल,अभिलेख आदि की सूचना हांसिल कर सकता हैं।

  • चलिए अब बात करते है की कितने समय के अंदर आवेदन का जबाब देना होता है।

– जन सूचना अधिकारी के लिए यह अनिवार्य है की वह आवेदनकर्ता के द्वारा माँगी गयी सूचना को 30 दिनों के अंदर उपलब्ध कराए। अगर ऐसा नही हो आयात है तो सूचना अधिनियम अधिकार के धारा 8 और 9 में बताए गए आधारों पर आवेदन रद्द करें।

– यदि आवेदनकर्ता के द्वारा माँगी गयी सूचना किसी व्यक्ति विशेष से या स्वतंत्रता से संबंधित है तो आवेदनकर्ता के सवालों के जबाब 48 घण्टे के अंदर देना होता हैं।

– यदि सूचना अधिकारी के द्वारा जबाब देने में 30 दिन से ज्यादा लेटलतीफी हो रही है तो ऐसा मन जाएगा की अधिकारी ने आवेदनकर्ता के के सवालों के जबाब देने से इनकार कर दिया है।

– यदि अधिनियम के द्वारा निश्चित समय में सूचना नही दी जाती है तो आवेदनकर्ता से कोई अतिरिक्त शुल्क नही लिया जा सकता हैं। उसे निशुल्क सूचना देनी होगी।

– यदि आवेदनकर्ता के द्वारा माँगी गयी सूचना किसी तीसरे पक्ष से संबंधित है तो सूचना अधिकारी का यह कर्तव्य है की वो अधिनियम के 11 का संदर्भ लेते हुए उचित कार्यवाही करें।

दोस्तों हमारा “ सूचना का अधिकार – क्या, कैसे पूरी जानकारी ” सामान्य ज्ञान का यह Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@gmail.com पर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

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