दोस्तों जिंदगी है तो चुनौतियों की कमी नही होगी। कुछ चुनौतियों से आप और हम आसानी से पार पा लेते है लेकिन कुछ ऐसे चुनौतियां होती है जो हमें बदलने पर अड़िग होती हैं। क़ामयाबी इस बात पर निर्भर करती है की आप खुद को कितने बेहतर ढंग से बदल पाते है। अपनी उलझनों का सामना करते हुए अनजान चीज़ों को गले लगाना हमें सफ़लता की ओर ले जाता है।

हम अपने जिंदगी में बहुँत सी चीज़े सीखते है समझते है और अपनी कामयाबी की ओर बढ़ते है। कोई घटना हो, व्यक्ति की परख हो या फिर कोई वस्तु, हम दो तरीके से उसे देखते है। कभी हमारी आंखों पर प्यार का चश्मा चढ़ा होता है तो कभी हमारी आंखों पर डर की चादर होती है। यदि हमारी आंखों पर किसी बात को लेकर चाहे वो रिश्ता,कामयाबी, जिंदगी में आगे बढ़ाना कुछ भी हो डर है तो निश्चित ही हम सफ़ल नही हो सकते है। हम इस बात के लिए नही जिम्मेदार है की हमारी आंखें क्या देख रही है.? हम इस बात के लिए जिम्मेदार है की हम उस हालात को कैसे अपनाते हैं।

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हम जिस दुनिया में जी रहे है वहां हमारी ‘हां’ की तरह हमारी ‘ना’ के भी मायने है। एक ही समय में हम सबकुछ का चुनाव नही कर सकते हैं। हमें अपना और अपने परिवार का ध्यान रखते हुए चुनाव करना होता हैं। कभी कभी हमारी ‘ना’ हमें उस बेचैनी और Guilty feeling से भी मुक्त रखती हैं जिसे हम ‘हां’ कहकर अपने ऊपर जिम्मेदारी की तरह लाद लेते हैं..!

हमारी जिदंगी में शब्द बहुँत मायने रखते है चाहे वो हम खुद अपनेआप से कहे या कोई और हमसे कहे। शब्द मायने बहुँत रखते हैं।

दोस्तों शब्दो के मायने को समझने के लिए एक छोटी सी कहानी बताना हूँ :-

एक शेर का छोटा बच्चा पहली बार शिकार करने के लिए निकला। अभी वो कुछ ही कदम आगे बढ़ा था की उसे एक लकड़बग्घा मिल गया उसने शेर के बच्चे को रोकते हुए बोला,“ और बच्चे कहाँ जा रहे हो.?” शेर के बच्चे ने खुश होते हुए बोला,“ चाचा आज मैं पहली बार खुद से शिकार करने निकला हूँ.!”

उसकी बात सुनकर लकड़बग्घा हँसते हुए होला,“ अभी तो तुम बहुँत छोटे हो और अभी तुम्हारी उम्र खेलने-कूदने की उम्र है , और ऊपर से तुम्हे शिकार करने का कोई तजुर्बा भी नही हैं भला तुम कैसे शिकार कर सकते हो..?”

लकड़बग्घे की बात सुनकर शेर का बच्चा निराश होकर पूरे दिन जंगल में भटकता रहा। एक दो बार उसे शिकार भी दिखा लेकिन प्रयास करने के बावजूद उसे सफ़लता नही मिली और उसे भूखे पेट ही घर लौटना पड़ा।

दूसरे दिन उसे जोर से भूख लगी थी इसलिए उसने फिर हिम्मत जुटाई और शिकार पर निकल पड़ा। कुछ दूर जाने पर उसे एक बूढे बंदर ने देखा और रोकते हुए पूछा,“ कहाँ जा रहे हो मेरे शेर बेटा..?”

“मैं शिकार पर निकला हूँ मामा,” शेर के बच्चे ने कहा। बंदर ने कहा,“ बहुँत अच्छा बेटा तुम्हारी गति और ताकत देखकर लगता है तुम भाविष्य में अच्छे शिकारी बनोगे। जाओ तुम्हे जल्दी ही सफ़लता मिलेगी।” यह सुनकर शेर का बच्चा उत्साहित होकर शिकार पर निकल पड़ा और कुछ ही समय की कोशिश के बाद उसे हिरण का शिकार करने का मौका मिल गया। और वह सफ़ल हो गया।

दोस्तों हमारी जिंदगी में शब्दों का बहुँत महत्व है। दोनो दिन शिकार पर निकला शेर का बच्चा वही था, उसमे वही स्फुर्ति और ताकत थी। लेकिन पहले दिन वह लकड़बग्घा की बातों से निराश हो गया और उसे अफ़सलता का मुँह देखना पड़ा। और दूसरे दिन बंदर की बातों से वह उत्साहित हो गया और शिकार करने में उसे सफ़लता हाथ लगी।

हमारा यही प्रयास होना चाहिए की हमारी बातों से कोई निराश न हो बल्कि प्रेरित हो। खुद से भी कभी भी नकारात्मक बातें न सोचे और न कहें। हमेशा अच्छी बात सोचे और करें।

साथ ही ऐसे लोगों से बचके रहना चाहिए जो हमेशा नकारात्मक सोचते और बोलते रहते हैं। सफ़ल और महान लोगों से ईर्ष्या करनेवालों की कोई कमी नही है लेकिन ऐसे लोग यह भूल जाते है की उस ऊँचाई पर पहुँचने के लिए सफ़ल लोगों ने कितनी मेहनत की हैं।

यहाँ कुछ उदहारण दे रहा हूँ:-

  • अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ वॉर एंड पीस ‘ को प्रकाशक को देने से पहले टालस्टाय ने उसे 80 बार लिखा था।
  • जॉर्ज स्टीफेंसन ने रेल के इंजन को विकसित करने के लिए अपने जीवन का 15 साल दिया।
  • स्कॉटिश हास्य कलाकार हैरी लोडर ने अच्छा गाने के लिए एक ही गीत का 10 हज़ार बार अभ्यास किया।
  • लेखक अलेक्जेंडर दमास ने रोज 18 घंटे लेखन कार्य किया और 40 वर्षों तक यह उनका दैनिक कार्य था।
  • एवन वेबस्टर के लगातार 30 वर्षों के प्रयास के बाद विश्व के प्रथम अंग्रेजी के शब्दकोश की रचना हुई।
  • वैज्ञानिक जेम्स वॉट ने 20 वर्षों की मेहनत के बाद भाप के इंजन का अविष्कार किया था।
  • वैज्ञानिक विलियम हार्वे ने 8 वर्षों तक लगातार रक्त संचरण प्रणाली का अध्ययन किया था।
  • पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने 1980 के चुनाव में 64 भाषण दिए थे, उस दिन उन्हें नाश्ता करने तक का समय नही मिला था।

दोस्तों हमारा “ शब्दों का महत्व ” Motivational Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@gmail.com पर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

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