दोस्तों क्या आप जानते है की हमारी निराशाओं, दुःखी रहने का बोझ, असफ़लता का डर , केवल हमारा मन ही नहीं उठता है बल्कि हमारा शरीर भी इसे झेलता हैं। इस संसार में जो कुछ भी हम हांसिल करना चाहते है वो सब चीज़े हमारे शरीर और मन की संतुष्टी के लिए ही हैं।
हमारे सपनों और हमारी खुशियों की राह हमारे मन के साथ-साथ हमारे शरीर से भी होकर गुजरती है लेकिन हम इसकी अनदेखी करते रहते हैं। इसका परिणाम यह होता है की हमारे मन की शक्ति के साथ-साथ शरीर की शक्ति भी कमजोर पड़ने लगती हैं।

मान लीजिए कोई आपको नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है, यह उसका कार्य है..! तो आप का कार्य क्या है..? आपको अपना उत्साह बनाये रखना चाहिए। क्योंकि ऐसे लोग कुंठित होते है और अपनी हताशा में दूसरों को दुःखी करने की कोशिश करते हैं।
क्योंकि ऐसे कुंठित लोग अक्सर जब दूसरे कामयाब लोगों को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे होते है तब ऐसा वो ख़ुद के कारण से करते है न की आपकी सफ़लता को देखकर। यह उनका काम है। यह आपका जीवन है और दूसरों की बातों, आलोचनाओं से दुःखी होने की कोई जरूरत नही हैं। अपना काम करते रहे।

कुछ लोग अपनी पिछली हार, असफ़लता और नक़ामयाबी से इतने डरे होते है की उसकी जकड़ से आज़ाद ही नही हो पाते और दोष किस्मत को देते रहते है।

इस बात को समझने के लिए एक कहानी बताता हूँ:-

एक बहुँत बड़ा व्यापारी था उसे व्यापार के सिलसिले में किसी दूसरे शहर जोकि एक नदी के उस पार था वहाँ हर हालत में पहुँचना था। उसने अपने एक वफादार नौकर को साथ लिया और रात में ही निकल गया। ठंडी के दिन होने की वजह से आसपास कुछ दिखाई नही दे रहा था वहाँ घना कोहरा था।
नदी के किनारें पहुँचने पर उन लोगों ने जैसे तैसे एक नाव खोजी और उसपर जाकर बैठ गए। अपने-अपने चप्पुओं से वे दोनो नाव खेने लगे। पूरी रात दोनो ने बहुँत मेहनत की और सुबह होते होते दोनो काफी थक गए थे।

पूरी रात बीत जाने पर जब कोहरा छटा तो उन दोनों को बुरी तरह झटका लगा। उन्होंने देखा जिस नाव को वे दोनों अंधेरे में पुरी रात खेते रहे हैं वह अभी भी वही है और वह अपनी जगह से जरा भी आगे नही बढ़ी थी।
अब नाव क्यों आगे नही बढ़ी..? दरअसल वह नाव की रस्सी को खोलना भूल गए थे, जो किनारे के एक खूंटे से बंधी हुई थी।

हम सभी अपने जीवन में सफ़ल होने के लिए बहुँत कुछ करना चाहते है,आगे बढ़ना चाहते हैं। उसके लिए प्रयास भी करना चाहते हैं। हम आगे बढ़ना तो चाहते है लेकिन पिछले दुःख ,तकलीफों,असफलताओं और समस्याओं को नही छोड़ते हैं।

दोस्तों ध्यान देनेवाली बात यह है की यदि हम अपने दुखों को, अपनी समस्याओं और असफलताओं को नही छोड़ेंगे तो वह खुद हमें पकड़ और बांध के रखेंगी। इसलिए हमें चाहिए की हम पिछली बातों से सबक लेके उन्हें पीछे छोड़ आगे बढ़े।

कुछ कोट्स के उदाहरण दे रहा हूँ :-

  • काबिल लोग न तो किसी को दबाते है और न ही किसी से दबते हैं।
  • जमाना भी अजीब है नाकामयाब लोगों का मजाक उड़ाता है, कामयाब लोगों से जलता हैं।
  • हर प्रॉब्लम के दो सॉल्युशन होते है भाग लो ( Run away ) या भाग लो ( Participate ) तय आप को करना हैं।
  • जिनमे आत्मविश्वास की कमी होती है वही लोग दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।
  • जब लोग आपकी कॉपी करने लगे तो समझ लेना जिंदगी में आगे बढ़ रहे हो।
  • काम इतनी शांति से करो की सफ़लता शोर मचा दे।
  • मैं उठना चाहता हूँ, दौड़ना चाहता हूँ, गिरना चाहता हूँ, बस रुकना नही चाहता।
  • जीतने वाले अलग चीज़े नही करते है, वो चीज़ों को अलग तरीके से करते हैं।
  • व्यक्ति को अपनी तुलना दुनिया के किसी भी अन्य व्यक्ति से नही करनी चाहिए, यदि वह वैसा करता है तो वह खुद की बेज़्ज़ती कर रहा हैं।
  • जब दूसरे लोग सो रहे हो तो पढ़ो, जब दूसरे खाली घूम रहे हो तो काम करों, जब दूसरे खेल रहे हो तो तैयारी करो, जब दूसरे सिर्फ अभिलाषा कर रहे हो तो सपने देखो।

दोस्तों हमारा “ नाव की रस्सी ” Motivational Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@gmail.com पर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

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