हम सभी भारतीय है। भारत देश के नागरिक, जो देश एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, पंथनिरपेक्ष लोकतंत्र गणराज्य है जिसमे सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का समान अधिकार है। भारतीय संविधान के हिसाब से सभी भारतीयों को कुछ मूल अधिकार प्राप्त हैं। आज के इस पोस्ट में उन मूल अधिकारों के विषय जनकरीं दी गयी हैं।

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भारतीय नागरिकों को भारतीय संविधान के हिसाब से 6 मुख्य मूल अधिकार प्राप्त हैं जैसे:-

1) समानता का अधिकार ( अनुच्छेद 14 से 18 )

समानता के अधिकार में धर्म नस्ल, लिंग, जाति या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध हैं। सरकारी पदों की प्रप्ति के लिए अवसर की समानता,उपाधियों का अंत,अश्पृश्यता का निषेध।

2) स्वतंत्रता का अधिकार ( अनुच्छेद 19 से 22 )

विचार और अभियवक्ति की आज़ादी, अस्त्र-शास्त्र रहित तथा शांतिपूर्वक सम्मेलन की स्वतंत्रता, समुदाय और संघ के निर्माण की स्वतंत्रता, भारत के सभी राज्यो में आने जाने की स्वतंत्रता, भारत के किसी भी राज्य में निवास की स्वतंत्रता, उपजीविका या व्यापर की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा जीवन की सुरक्षा की स्वतंत्रता, किसी भी आपातकाल की स्थिति में सरंक्षण की स्वतंत्रता आदि।

3) शोषण के विरुद्ध अधिकार ( अनुच्छेद 23 से 24 )

मानव तस्करी यानी मनुष्यों के क्रय-विक्रय पर रोक। नागरिकों के अधिकारों के हनन पर रोक, 14 वर्ष से काम वर्ष के बच्चों से कल-कारखानों, अन्य खरतनाक कामों में नौकरी पर रखने पर निषेध।

4) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ( अनुच्छेद 25 से 28 )

अन्त:करण की स्वतंत्रता, धार्मिक मामलों में प्रबंध करने की स्वतंत्रता, धार्मिक कार्यों के लिए निश्चित धन पर कर की अदायगी से छूट, शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने या न करने की स्वतंत्रता।

5) संस्कृति और शिक्षा संबंधित अधिकार ( अनुच्छेद 29 से 30 )

भारतीय संविधान सभी अल्पसंख्यक नागरिकों को यह अधिकार देता है की वे अपनी भाषाओं, लिपि व संस्कृति को बनाए रख सकते हैं। इस कार्य के लिए वे शिक्षा संस्थाओं की स्थापना व उसका संचालन कर सकते हैं।

6) संवैधानिक उपचारों का अधिकार ( अनुच्छेद 32)

यह अधिकार सभी नागरिकों को यह छूट देता है की वे अपने अधिकारों के सरंक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायलय के पास जा सकते है व अपने अधिकारों को लागू करने की माग कर सकते हैं।
भारतीय संविधान द्वारा प्राप्त किये गए इस अधिकार को डॉ बी. आर. अम्बेडकर ने संविधान का हृदय तथा आत्मा की संज्ञा दी है।

नोट :- भारतीय नागरिकों को वर्तमान समय में सम्पत्ति का अधिकार मूल अधिकार के रूप में प्राप्त नही हैं। इसे 44वें संविधान संसोधन द्वारा एक कानूनी अधिकार बना दिया गया जिसका उल्लेख अनुच्छेद “300(क)” में हैं।

जिस तरह से भारतीय नागरिकों के “मूल अधिकार” है ठीक उसी तरह से नागरिकों के “मूल कर्तव्य” भी हैं जैसे :-

a) संविधान का पालन व उसके आदर्शों, संस्थाओ और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान।

b) राष्ट्रीय आंदोलन के प्रेरक आदर्शों का पालन।

c) भारत के संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना।

d) देश की रक्षा और राष्ट्र सेवा।

e) भारत के लोगों में समरसता और भातृत्व की भावना का विकास।

f) समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परम्परा की रक्षा।

g) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानाजर्न का विकास करना।

h) प्राकृतिक पर्यवरण की रक्षा और सभी प्रणियों के प्रति दया भाव।

i) सार्वजनिक संपति की सुरक्षा और हिंसा से दूर रहना।

j) व्यक्तिगत और सामूहिक उत्कर्ष का प्रयास।

k) माता-पिता या सरंक्षक द्वारा 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना।


दोस्तों हमारा “ क्या आपको पता है हमारे मूल अधिकार कौन से है ? ” सामान्य ज्ञान का यह Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@gmail.com पर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

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