दोस्तों क्या आपने कभी सोचा की कोई भी निशानेबाज 15 सेकंड अपनी क्षमता (Ability) का प्रदर्शन करने के लिए कभी-कभी 10 तो कभी 15 साल तक अभ्यास( Practice) करता हैं। तो क्या आप उन्हें खुशनसीब मानेंगे..?

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हम खुद को अपने जाल में बांध लेते है कुछ झूठी बातें बोलकर, जैसे :-

– मैं एक बार कोशिश करके देखूंगा।
– ‎मैं कोशिश करूंगा।
– ‎मैं जानता हूँ यह तरीका काम नही करेगा।
– ‎मैंने वैसे भी बहुँत कोशिश करके देख लिया हैं।
– ‎अब मेरे पास खोने के लिए कुछ भी नही बचा।
– ‎मैं तो जनता हूँ यह सफ़ल नही हो सकता.!
– ‎मुझे यह Idea नही पसंद, यह बकवास है।
– ‎यह काम नही करेगा।

दोस्तों अगर मैं लिखने लगू तो शायद महीनों तक लिखता रहूं , क्योंकि हमारे बहाने बनाने की जो लिस्ट है वो बहुँत लंबी है।

अगर हमारी सोच इस तरीके से है तो हम निश्चित रूप से असफ़लताओ को ही बुलावा देंगे। क्योंकि इस तरह सोचने का तरीका हमारे साहस (Courage) , आत्मविश्वास( Self-confidence) और प्रतिबद्धता ( Commitment) की कमी को दिखाता हैं।
ध्यान रखिये कोई भी काम आधे मन से करने का मतलब असफ़लता की उम्मीद करना और उसे ही हासिल करना हैं। तो अब आप बताइए कि कोई भी काम को करते समय , क्या आप असफ़लता की उम्मीद करते हैं.?

चलिए मैं आपको इस बात को सही से समझाने के लिए एक कहानी बताता हूँ :-

एक व्यक्ति था। जिसके पास एक बहुत ही लंबा चौड़ा घोड़ा था । तो हुआ यूं कि एक बार उसके नगर में घोड़ो की दौड़ की प्रतिस्पर्धा रखी गयी।

उस आदमी ने भी सोचा क्यों न अपने घोड़े को इसमे ले जाया जाए। यही सोचकर उसने अपने घोड़े को खूब खिलाना पिलाना शुरू कर दिया।

2 सप्ताह बाद जब प्रतिस्पर्धा शुरू हुई तो यह व्यक्ति भी अपने घोड़े को लेके चला गया। जब रेस शुरू हुई तो उसे लगा उसका ही घोड़ा सबसे आगे होगा। लेकिन यह क्या वह तो सबसे आखरी नंबर पर था।

घर आकर उसने यह सोच कर संतोष कर लिया कि शायद उसकी किस्मत में यही लिखा था।

इस कहानी से एक बात तो पक्की है कि घोड़े के मालिक ने न तो घोड़े को अभ्यास( Practice ) करवाया और न ही उसे चुस्त दुरुस्त रखने के लिए प्रशिक्षण ( Training ) दी। जब यही घोड़ा हार गया तो उसने अपनी गलती न मानते हुए किस्मत को दोषी बात दिया।

लोग अपने आलसीपन ( Laziness ) और जरूरी चीज़ों को न करने की वजह से असफल हो जाते है, और फिर क़िस्मत को दोष देते फिरते हैं। असफ़ल इंसान हमेशा यही सोचता है कि जिंदगी ने उसके साथ नाइंसाफ़ी की हैं। जिन्हें बस अपने आसपास रुकावटे ही दिखाई देती हैं , ऐसे लोग यह भूल जाते है कि जो आज सफ़ल है उसे भी इन्ही सब रुकावटों का सामना करना पड़ा होगा लेकिन सफल इंसान ऐसे रुकावट पर विजय हांसिल कर लेते हैं।

मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है :- असफल इंसान

अच्छा हुआ मुझे कुछ नया सीखने मिला :- सफल इंसान

एक सफल और एक असफ़ल इंसान में बस इतना ही फर्क है।

तो मेरा सवाल यही है :- तो क्या आप खुद को बदनसीब मानतें है..?

ऐसे में अब हमें क्या करना चाहिए..?

क्या हम नीचे दिए गए बातों पर अमल कर सकते है..?

– हारने के लिए नही जितने के लिए लड़ो।
– ‎दूसरों की ग़लतियों को देखो मत,उससे सिखों।
– ‎ऊपरवाले से जितना मिला है उससे ज्यादा देने की कोशिश करो।
– ‎बिना कुछ दिए कुछ भी पाया नही जा सकता है।
– ‎हमेशा अच्छे और बड़ें लक्ष्य बनाओ।
– ‎हमेशा दूर की सोचों।
– ‎कोई भी फ़ैसला लेते वक्त हमेशा स्तिथि को ध्यान में रखों।
– ‎अपनी सच्चाई और अच्छाई के साथ कभी भी समझौता न करें।
– ‎अच्छे दोस्तों की लिस्ट बनाओ। हज़ारों बुरे दोस्तों से एक अच्छा दोस्त काफी हैं।
– ‎हमेशा याद रखों आपमें काबिलियत कूट-कूट के भारी है,अब यह आपको तय करना है कि आप इसका इस्तेमाल करेंगे या नहीं।

जाते जाते :-

“ एक कहावत है इंतज़ार करनेवालों को अच्छी चीज मिलती तो है ,लेकिन ऐसी चीज़ें ही मिलती है, जिन्हें कोशिश करने वाले छोड़ जाते हैं। ”

——–अब्राहम लिंकन

दोस्तों हमारा “क्या आप अपनेआप को Unlucky मानतें है ..?” Motivational Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@gmail.comपर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

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