टालमटोल की आदत , जो निर्णय (Decision) लेने में सबसे बड़ी रुकावट है , यह एक तरीके से हमारी सफलता का सबसे बड़ा शत्रु है , जिसपर हर एक इंसान को विजय हांसिल करनी चाहिए।

Hum nirnay kyu nahi le pate safal hone ke liye ,निर्णय लेने में टालमटोल क्यों करते है हम ,Conquering the habit of avoidance

किसी भी इंसान की असफ़लताओ के पीछे सबसे बड़ा कारण “ निर्णय का अभाव ” ( Lack of judgment ) हैं , जो उन्हें सफल नही होने देता हैं। एक सफल इंसान में हमेशा से ऐसा देखा गया है कि “ उन्हें हमेशा तत्काल निर्णय पर पहुचने की आदत थी। ” यदि किसी कारण से उन्हें अपने फ़ैसले बदलने पड़ते भी थे तो भी वे इसमे कोई जल्दबाज़ी नही करते है ।

जो लोग अपने जीवन में अभी तक Unsuccessful है , उनमे एक बात आम (Common) है कि वे निर्णय ही नही लेते थे , यदि निर्णय ले भी लिए तो उसमें इतना टाइम लगा देते थे , और आगे जाकर भी वे अपना निर्णय बदलने में देरी नही करते थे। ऐसे लोग खुद के विचारों से ज्यादा दूसरों के विचारों से ज्यादा प्रभावित होते हैं।

ऐसे लोग , अपने लिए सोचने का काम अपने पड़ोसियों , रिस्तेदारों और दोस्तों पर छोड़ देते हैं। दुनिया मे सबसे सस्ती अगर कोई चीज़ है तो “ राय देना ” हैं। हर किसी के पास होलसेल में पड़ी है , एक से मांगो चार दे देंगे। ऐसे में यदि आप किसी चीज़ के लिए कोई निर्णय लेने से पहले दुसरो की बातों से प्रभावित होते है तो यकीन मानिए ज्यादातर या यूं कहें सारे Case में आप असफल होते जाएंगे।

हमारे दोस्त या फिर हमारे रिश्तेदार जाने अनजाने में ही अक्सर अपनी बातों , राय, कई बार तो हँसी उड़ाकर भी हमारे “ निर्णय ” और हमारे मनोबल को तोड़ने की कोशिश करते हैं। न जाने ऐसे कितने लोग है जो दूसरों के द्वारा दी गयी राय को लेकर अपनी पूरी जिंदगी हीन भावना में गुजार देते हैं।

आपके पास आपका खुद का दिमाग ( Mind ) है।
इसलिए अपने Mind का उपयोग करें और अपने खुद के लिए गए निर्णय को अपना मनोबल बनाकर वहाँ तक पहुँचने कि लगातार कोशिश करते रहें ।

जिन लोगों का ज्ञान आधा-अधूरा होता है वह
अध-जल गगरी की तरह छलकता बहुँत है। ऐसे लोग आप के सामने ऐसा प्रभाव बनाएंगे जैसे इनके पास ज्ञान का प्रचुर भण्डार है। ऐसे लोग ज्यादातर बस बोलते ही रहते है और सुनते बहुँत कम हैं। यदि आप तुरंत कोई निर्णय लेना चाहते है, जो आपके हिसाब से आपके लिए उपयुक्त (Suitable) है तो अपनी आँखें और कानों को खुला रखिए और हो सके तो अपने मुँह को बंद ही रखिये। और आप जो भी निर्णय ले रहे है उसपर जल्द से जल्द फ़ैसला ले लीजिए , नही तो वो आपके टालमटोल की फ़ाइल में चला जायेगा। और फिर आप उस निर्णय पर कब विचार करेंगे ये कोई निश्चित नही है। इसलिए अगर सफ़लता पाना है तो टालमटोल की फ़ाइल को अपने दिमाग से डिलीट कर दीजिए।

जो लोग बस बातें ही करते रहते है दरअसल वे लोग काम की बात और काम बहुँत कम करते हैं। इसलिए यदि आप भी बहुँत अधिक बोलते है और कम सुनते है तो , न सिर्फ आप दूसरों के ज्ञान को कम हासिल कर रहे है बल्कि अपने राज , अपनी योजनाओं ( Plans ) और अपने लक्ष्य ( Golas ) को भी ऐसे लोगो के सामने उजागर कर देते है जिन्हें आपको हराने में मज़ा आता है । क्योंकि ऐसे लोग आपकी सफ़लता से सायद चिढ़ते हैं।

दोस्तों अगर आप सच मे सफल होना चाहते हो तो , चाहे वो जो भी हो नौकरी में Top पर जाना हो , बिज़नेस में नाम कामना हो या फिर कुछ और..आपको एक बात का ध्यान तो रखना ही पड़ेगा कि आपको अपने अंदर की टालमटोल वाली बीमारी की आदत को छोड़ना ही पड़ेगा।

दोस्तों हमारा “ निर्णय लेने में टालमटोल क्यों करते है हम..? ” Motivational Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@ पर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

2 COMMENTS

    • बहुँत बहुँत धन्यवाद सर आपका इस अनमोल कमेंट के लिए ….

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