हमारे भारत देश में मसालों का बड़ा महत्व हैं। सब्जी हो या कोई स्वादिष्ट व्यजन मसालों का उसमे विशेष स्थान होता है। लेकिन क्या आप जानते है की मसालों का घरेलू इलाज में बड़ा महत्व हैं। दोस्तों आज मैं कालीमिर्च से होने वाले आयुर्वेदिक फायदें के बारे में बताने वाला हूँ तो चलिए जान लेते है।

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नेत्र ज्योति :- घी, पिसी कालीमिर्च समान मात्रा में मिलाकर चौथाई चम्मच सुबह-शाम से नेत्र-ज्योति तेज होती हैं।

कफ :- गिनकर 30 कालीमिर्च लेकर पीस ले अब उसे पानी में उबाल ले। चौथई पानी रहने पर छान ले उसमे 1 चम्मच शहद मिलकर सुबह-शाम पिये। इससे खाँसी, कफ में काफी आराम मिलता हैं।

बलगम :- दस कालीमिर्च, 15 तुलसी के पत्ते पीसकर शहद में मिलाकर नित्य तीन बार चाटने से गले में जमा बलगम, कफ बाहर निकलकर गला साफ हो जाता हैं।

रूसी और जुएँ :- 6 कालीमिर्च, 12 सीताफल के बीज पानी में पीसकर घी में मिलाकर रात को सोने से पहले सर में लगाएं। प्रातः सर धो ले। इससे बालों में पड़ी जुएँ खत्म हो जाती हैं। आंखों में जाने से बचाए।

माइग्रेन :- माइग्रेन से पीड़ित को 12 ग्राम कालीमिर्च चबाकर खाने के बाद ऊपर से 30 ग्राम देशी घी पियें।

ज्वर :- यदि आपको ज्वर में उबासियाँ आती हो, शरीर में कपकपी, दुर्बलता, और दर्द हो तो सुबह सुबह 20 कालीमिर्च कूटकर एक ग्लास पानी में उबालें। चौथाई पानी रहने पर हल्का गर्म ही रहे तभी पियें। ज्वर से राहत मिलेगी।

कफ ज्वर :- कफ ज्वर होने पर 5 कालीमिर्च, 5 तुलसी के पत्ते, 4 मुनक्का, जरा सी अदरक, एक इलायची और एक लौंग सबको चाय के साथ उबालकर डेली 3 बार लेने से कफ ज्वर ठीक हो जाता हैं।

बवासीर ( Piles ) :- (a) 1 कालीमिर्च स्वतः में बीज सहित मुनक्का दोनो को एक ससथ सुबह – शाम लेने से मस्से सुख जाते हैं। (b) 10 कालीमिर्च और 60 ग्राम अनार के पत्ते दोनो को पीसकर एक ग्लास पानी में घोरकर नित्य लेने से बवासीर में रक्त गिरना बंद हो जाता हैं।

कट जानेपर :- जब कभी कोई कार्य करते वक़्त चाकू, छुरी या किसी धारदार चीज़ से कट जाए तो रक्तस्राव को साफ पानी से धोकर बारीक पिसी हुई कालीमिर्च किसी कपड़े की सहायता से दबा दे। रक्तस्राव बंद हो जाएगा और जलन नही होगी।

गैस होनेपर :- 10 कालीमिर्च एक गिलास पानी में उबालकर पीने से गैस में लाभ होता हैं।

सुंदर संतान :- किसी भी गर्भवती स्त्री को गर्भावस्था के 8 माह तक प्रातः चौथाई चम्मच पिसी कालीमिर्च , एक चम्मच मिश्री , एक चम्मच माखन या घी रोज खाने को दे। ठीक इसके 20 मिनट बाद नारियल और आधा घंटे बाद सौंफ खायें। आधे घंटे बाद गर्म दूध पियें। इसके बाद हल्का भोजन या नाश्ता ले। इससे संतान सुंदर होगी।

धातु का गिरना :- रात में 250 ग्राम दूध में 10 कालीमिर्च डालकर गर्म करें, ठंडा हो जाने पर छान ले। पहले कालीमिर्च खा ले फिर उसके बाद वही गर्म दूध पियें। इससे धातु पुष्ट होती है और बल मिलता हैं।

सुखी खाँसी :- कालीमिर्च किसी भी प्रकार की खासी के लिए वरदान हैं।

  • कालीमिर्च और मिश्री को समान भाग में पीस ले और इसमे उतनी ही मात्रा में घी मिलाए ताकि इसकी गोलियां बन सके। इस गोली को मुँह में रख कर चूसने से हर प्रकार की खाँसी में लाभ मिक्ता हैं।
  • 10 कालीमिर्च पीसकर शहद में मिलकर चाटने से भी खासी में काफी हद तक आराम मिलता है।
  • 20 कालीमिर्च तीन चमच्च घी में डालकर गर्म करें। कालीमिर्च गर्मी से कड़कड़ा कर ऊपर आ जाए तो आँच से उतार ले। इसमे 20 ग्राम पिसी मिश्री को डालकर मिला लें। फिर इसे चबाते हुए खायें। इसके बाद 1 घंटे तक कुछ भी न ले। खाँसी में लाभ मिलेगा।
  • एक चमच्च पिसी हुई कालीमिर्च 60 ग्राम गुड़ में मिलाकर गोलियाँ बना ले और सुबह – शाम चूसें। इससे किसी भी प्रकार की खासी ठीक हो जाती हैं।
  • प्रातः 5 कालीमिर्च पान में रखकर चबाने और रस चूसने से कैसी भी खाँसी ठीक हो जाती हैं।
  • कालीमिर्च, छोटी हरड़, पीपल हर एक को 25 ग्राम मिलाकर पीस ले। भोजन के बाद सुबह-शाम एक-एक चम्मच फंकी लेने से खाँसी ठीक हो जाती हैं।

बिवाइयाँ फटना :- कालीमिर्च, राल, कत्था को समान मात्रा में लेकर पीस ले। अब इसमे 2 चम्मच देशी घी और चार चम्मच चमेली का तेल मिलाए और लोहे के बर्तन में डालकर गर्म कर ले। फिर इसे सीसी में भरकर रख ले। इसे लगाने से बिवाइयाँ फटना ठीक हो जाता हैं।

दोस्तों हमारा “ कालीमिर्च के चमत्कारी लाभ ” हेल्थ ज्ञान Article कैसा लगा। यदि आप का इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सुझाव, शिकायत हो तो आप हमें gyaankidhara@gmail.com पर Contact कर सकते हैं धन्यवाद।

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